ज़िन्दगी का स्वाद !

अगर इन्शान हो ! तो इंसानियत भी हो |
क्योंकी,
इस चार दिन की जिंदगी मे,
फिर अंधेरी रात है|
इसलिए,
जिंदगी के साथ ही,
जिंदगी आबाद हो|
क्यूकी पता नहीं, अंत के बाद क्या ?
सो जो भी हो…
जिंदगी का एक अपना स्वाद हो|

ये आम लोगो की जिंदगी की कैसी ये दौर है,
बस होर , और शोर है,
बेमतलब की अंधी दौर है|
ये दौर है उस मंजिल की ,
जिसका न ठोर है न ठिकाना,
बस दौर, बस दौर ….
पता नहीं कंहा है जाना|
इसलिए जिंदगी के साथ ही,
जिंदगी आबाद हो|
क्यूकी पता नहीं, अन्त के बाद क्या ?
सो जो भी हो…
जिंदगी का एक अपना स्वाद हो|

वो, जो देर रात घर लौटता है,
फिर सुबह जल्दी से भागता है,
जिंदगी ज़ीने की चाहत मे ,
जिंदगी को काटता है|
कभी खवाहिसो का बोझ उठाए
तो कभी जिम्मेदारियों की गठरी
कभी बिना इजाजत के,
तो कभी बिना मर्जी।
रोते.. हस्ते.. गाते.. खेलते…
निकाल जाए ज़िन्दगी की जर्नी…
पूरा न सही, तो थोरा ही सही,
इस संघर्ष का भी एक दाम अता हो,
इसलिये जिंदगी के साथ ही,
जिंदगी आबाद हो|
क्यूकी पता नहीं, अंत के बाद क्या ?
सो जो भी हो…
जिंदगी का अपना एक स्वाद हो!


जिंदगी का स्वाद…… कुछ ऐसा होता,
थोड़ा तीखा, मीठा थोड़ा ज्यादा होता
थोड़ा दर्द होता, सुकून थोड़ा ज्यादा होता
उम्मीदों वाली सुबह भी होती,
और सपनों वाला शाम भी होता ।
तू भी होती, तेरा साथ भी होता,
तेरे नखरे, तेरे झगड़े, तेरा एहसास भी होता।
पछतावे के जख्म पर वक्त का मरहम सा होता
जो भी होता…
जिंदगी का अपना एक स्वाद होता!

                                                  !!आशुतोष!!

दो शब्द :-

ये पोएट्री आपके लिए, ये पोएट्री मेरे लिए, ये पोएट्री उन सबके लिए के लिए जो अपनी ज़िन्दगी में रोज रोज संघर्ष करते कुछ पाने के लिए, कुछ करने के लिए।
अपने सपनों को पूरा करने के चाहत में, जो ज़िन्दगी जीना भूल जाते हैं, ये पोएट्री उनके लिए…

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